Tamanna Muddaton Se Hai Naat Lyrics

तमन्ना मुद्दतों से है, जमाल-ए-मुस्तफ़ा देखूँ

इमाम-उल-अंबिया देखूँ, हबीब-ए-किबरिया देखूँ


वो जिन के दम-क़दम से सुब्ह ने भी रौशनी पाई

मुनव्वर कर दिया जिस ने फ़ज़ा, वो रहनुमा देखूँ


वो जिन की बरकतों से अब्र-ओ-बाराँ बस्ते 'आलम में

तमन्ना क़ल्ब-ए-मुज़्तर की, वो दुर्र-ए-बे-बहा देखूँ


क़दम बाहर मदीने से, तसव्वुर में मदीना है

इलाही या इलाही ! 'अज़मतों की इंतहा देखूँ


ये दुनिया बे-सबात-ओ-बे-वफ़ा-ओ-ग़म का गहवारा

ये है मतलूब, दार-ए-बे-वफ़ाई में वफ़ा देखूँ


वो मब्दा ख़ल्क़-ए-'आलम का, दुरूद उन पर, सलाम उन पर

मेरे मौला ! ये मौक़ा दे कि ख़ातमुल-अंबिया देखूँ


कभी हो हुस्न की महफ़िल, कभी हो शौक़ का मंज़र

कभी आँसू की ज़ंजीरों में 'आशिक़ की सदा देखूँ


रसूलुन-क़ासिम-उल-ख़ैराति फ़ि-द्दुनिया व फ़िल-'उक़्बा

शफ़ीक़ अज़ नफ़्स-ए-मा दर मा नबी-ए-मुज़्तबा देखूँ


दर-ए-जन्नत पे हाज़िर हों रसूल-ए-पाक के हम-राह

शफ़ा'अत का ये मंज़र या ख़ुदाया मैं रज़ा देखूँ


शायर: मुफ़्ती रज़ा-उल-हक़

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